खेतों तक पहुंचे शिक्षक,16 किलोमीटर का सफर तय कर धान रोप रहे विद्यार्थियों को स्कूल लौटने के लिए किया प्रेरित
ग्लोबल इंडिया टूडे न्यूज़ M.P./कटनी से राहुल गोविन्द सोनकर की रिपोर्ट/ शिक्षा के प्रति समर्पण का एक प्रेरणादायक उदाहरण रीठी विकासखंड के आदिवासी क्षेत्र नैंगवा से सामने आया है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नैंगवा के शिक्षकों ने विद्यालय में कम उपस्थिति मिलने पर विद्यार्थियों का इंतजार करने के बजाय स्वयं खेतों तक पहुंचकर उन्हें शिक्षा का महत्व समझाया।
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बाद विद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति अपेक्षा से कम थी। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देशानुसार नामांकन एवं नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य श्री विपिन तिवारी एवं अतिथि शिक्षकों ने बच्चों की तलाश शुरू की। गांव पहुंचने पर अधिकांश घर खाली मिले। जानकारी मिली कि बच्चे अपने परिजनों के साथ खेतों में धान रोपाई का कार्य कर रहे हैं।
इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी श्री सच्चिदानंद पांडे के मार्गदर्शन में शिक्षकों ने लगभग 16 किलोमीटर का कठिन सफर तय कर खेतों तक पहुंचकर विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से मुलाकात की। शिक्षकों ने आत्मीय संवाद करते हुए समझाया कि खेती परिवार की आजीविका का आधार है,लेकिन शिक्षा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि नियमित शिक्षा से बच्चे भविष्य में अपने परिवार की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
शिक्षकों की इस संवेदनशील पहल से प्रभावित अभिभावकों ने भरोसा दिलाया कि वे अब बच्चों को खेतों में काम के लिए साथ नहीं ले जाएंगे और नियमित रूप से विद्यालय भेजेंगे।
यह पहल जिला प्रशासन एवं स्कूल शिक्षा विभाग के "हर बच्चा स्कूल में,हर बच्चे तक शिक्षा" अभियान को नई मजबूती देती है। इसका उद्देश्य केवल बच्चों का नामांकन कराना नहीं,बल्कि उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कर शिक्षा से जोड़कर रखना है।
रीठी के नैंगवा विद्यालय के शिक्षकों ने यह साबित कर दिया कि जब शिक्षक अपने कार्य को केवल नौकरी नहीं,बल्कि मिशन मानते हैं,तब शिक्षा स्वयं बच्चों तक पहुंचती है। खेतों और पगडंडियों तक पहुंचकर विद्यार्थियों को स्कूल से जोड़ने की यह पहल समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।

