शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप,मुरैना के डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर गिरफ्तार,न्यायिक हिरासत में भेजे गए,युवती की शिकायत पर पुलिस ने की कार्रवाई,गिरफ्तारी के बाद अस्पताल में कराया गया परीक्षण,जांच जारी।

शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप,मुरैना के डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर गिरफ्तार,न्यायिक हिरासत में भेजे गए।



युवती की शिकायत पर पुलिस ने की कार्रवाई,गिरफ्तारी के बाद अस्पताल में कराया गया परीक्षण,जांच जारी।

ग्लोबल इंडिया टूडे न्यूज M.P.

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर के खिलाफ एक युवती द्वारा लगाए गए दुष्कर्म के आरोपों ने प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। युवती की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया। बाद में उन्हें न्यायालय में पेश किया गया,जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में मामले को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार,युवती ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि उसकी पहचान सोशल मीडिया के माध्यम से डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर से हुई थी। दोनों के बीच बातचीत बढ़ने के बाद अधिकारी ने उससे विवाह करने का आश्वासन दिया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी भरोसे का लाभ उठाकर अधिकारी ने उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। युवती का कहना है कि शुरुआत में उसे शादी का विश्वास दिलाया गया,लेकिन बाद में विवाह से इनकार कर दिया गया।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि अधिकारी ने कथित रूप से विभिन्न स्थानों पर युवती के साथ दुष्कर्म किया। युवती का आरोप है कि पहले उसे कार में और बाद में एक फ्लैट तथा अन्य स्थानों पर ले जाकर उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए गए। जब उसने विवाह के संबंध में दबाव बनाया तो आरोपी ने कथित रूप से दूरी बनाना शुरू कर दिया और बाद में शादी से साफ इनकार कर दिया।

युवती की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया। इसके बाद बुधवार रात डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के दौरान उनकी तबीयत खराब होने और रक्तचाप बढ़ने की जानकारी सामने आई,जिसके चलते उन्हें चिकित्सकीय परीक्षण के लिए अस्पताल ले जाया गया।

अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण के बाद पुलिस ने नियमानुसार आरोपी अधिकारी को न्यायालय में प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिए। इसके साथ ही पुलिस द्वारा मामले की विस्तृत जांच जारी रखी गई है। जांच अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर जांच की जाएगी तथा आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं।

घटना के सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई की गई। उच्च अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी अधिकारी को निलंबित कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारी को पद पर बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती,इसलिए विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पर गंभीर आपराधिक आरोप लगाए गए हैं। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों पर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि विवाह का झांसा देकर बनाए गए संबंधों से जुड़े मामलों में न्यायालय उपलब्ध साक्ष्यों,परिस्थितियों और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर निर्णय करता है।

फिलहाल पुलिस युवती के आरोपों,डिजिटल साक्ष्यों,कॉल रिकॉर्ड,चैटिंग और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी। वहीं दूसरी ओर आरोपी पक्ष को भी कानून के तहत अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार प्राप्त है।

मामले ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। प्रशासनिक सेवा से जुड़े अधिकारी पर लगे आरोपों के कारण यह प्रकरण चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और आगामी न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं,जिनके आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।

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