खबर का त्वरित असर- ग्राम पंचायत पाली की सीसी सड़क की जांच के लिए टीम गठित।

 खबर का त्वरित असर-
ग्राम पंचायत पाली की सीसी सड़क की जांच के लिए टीम गठित।

ग्रामीण खबर MP की खबर पर जनपद सीईओ यजुर्वेन्द्र कोरी का संज्ञान,दो दिवस में प्रतिवेदन मांगा,दोषी पाए जाने पर सरपंच-सचिव व इंजीनियर पर कार्रवाई के संकेत।

ढीमरखेड़ा,ग्रामीण खबर MP।

 जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा की ग्राम पंचायत पाली में फ्लोरी मशीन से बन रही सीसी सड़क के निर्माण कार्य में सामने आई कथित अनियमितताओं को लेकर प्रकाशित खबर का व्यापक असर देखने को मिला है। जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाले ग्रामीण खबर MP द्वारा इस मामले को विस्तार से प्रकाशित किए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आया और तत्काल प्रभाव से जांच के आदेश जारी किए गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत पाली में सीसी सड़क निर्माण कार्य फ्लोरी मशीन के माध्यम से कराया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण स्थानीय मजदूरों को मिलने वाला रोजगार प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क की निर्धारित मोटाई दर्शाने के लिए किनारों पर नाली जैसी संरचना बनाकर अधिक मोटाई दिखाई जा रही है, जबकि सड़क के मध्य भाग में मात्र लगभग दो इंच सीसी की ढलाई की जा रही है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सीधे तौर पर निर्माण मानकों की अनदेखी और शासकीय राशि के दुरुपयोग की श्रेणी में आ सकता है।

ग्रामीण खबर MP ने अपने समाचार में यह भी उजागर किया था कि निर्माण कार्य में उपयोग किए जा रहे मटेरियल की गुणवत्ता संदिग्ध है। कुछ ग्रामीणों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि सीमेंट, गिट्टी और रेत का अनुपात मानक के अनुरूप नहीं रखा जा रहा है, जिससे सड़क की मजबूती और दीर्घायु पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क अभी से कमजोर बन रही है तो आगामी वर्षा ऋतु में इसके क्षतिग्रस्त होने की पूरी आशंका है, जिससे शासन की राशि व्यर्थ जाएगी और आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

ग्रामीण खबर MP द्वारा इन तथ्यों को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी यजुर्वेन्द्र कोरी ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने तत्काल एक जांच टीम का गठन करते हुए सहायक यंत्री अजय केशरवानी और उपयंत्री प्रदीप यादव को स्थल निरीक्षण कर विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जांच टीम को दो दिवस के भीतर प्रतिवेदन सौंपने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन इस मामले को लेकर त्वरित कार्रवाई के मूड में है।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी यजुर्वेन्द्र कोरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर संबंधित सरपंच, सचिव एवं इंजीनियर के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि यदि निर्माण कार्य में वित्तीय अनियमितता या गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो न केवल दंडात्मक कार्रवाई होगी, बल्कि आवश्यक होने पर राशि की वसूली और कार्य की पुनः गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।

ग्रामीणों में इस कार्रवाई से आशा की नई किरण जगी है। उनका कहना है कि यदि मीडिया और प्रशासन इसी प्रकार सजग रहे तो पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकती है। ग्रामीण खबर MP ने इस पूरे प्रकरण में जनहित को सर्वोपरि रखते हुए लगातार तथ्यात्मक रिपोर्टिंग की है और आगे भी जांच की प्रगति, प्रतिवेदन की स्थिति तथा संभावित कार्रवाई पर नजर बनाए रखने का संकल्प दोहराया है।

क्षेत्र में अब चर्चा इस बात को लेकर है कि जांच प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष और पारदर्शी होगी। ग्रामीणों की मांग है कि जांच स्थल पर तकनीकी माप उपकरणों के साथ की जाए और सड़क की वास्तविक मोटाई, मटेरियल की गुणवत्ता तथा लागत का सत्यापन सार्वजनिक रूप से किया जाए। कुछ ग्रामीणों ने यह भी सुझाव दिया है कि यदि आवश्यक हो तो उच्च स्तर की तकनीकी टीम से पुनः परीक्षण कराया जाए ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न रहे।

यह मामला केवल एक सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की पारदर्शिता और जवाबदेही का प्रतीक बन गया है। यदि जांच निष्पक्ष रूप से संपन्न होती है और दोषियों पर कार्रवाई होती है तो यह एक सशक्त संदेश होगा कि जनहित से जुड़े मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं यदि जांच में लीपापोती की आशंका सत्य सिद्ध होती है तो यह जनविश्वास को आघात पहुंचा सकता है।

ग्रामीण खबर MP इस पूरे घटनाक्रम पर सतत निगरानी रखे हुए है। आगामी दिनों में जांच प्रतिवेदन की स्थिति, प्रशासनिक निर्णय और संभावित कार्रवाई की विस्तृत जानकारी पाठकों तक पहुंचाई जाएगी, ताकि जनता को हर तथ्य की जानकारी मिलती रहे और विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

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